वो मुस्कान झूठी है या सच्ची, ये मैं क्या जानूं, सच्ची है मोहब्बत या नफरत उसकी, ये मैं क्या जानूं मैं जानू बस मेरा प्यार जिसपे होता हूं मैं निसार, बाकी सब मैं क्या जानू...
वो मुस्कान झूठी है या सच्ची, ये मैं क्या जानूं, सच्ची है मोहब्बत या नफरत उसकी, ये मैं क्या जानूं मैं जानू बस मेरा प्यार जिसपे होता हूं मैं निसार, बाकी सब मैं क्या जानू...
कितना हसीन है ये नजारा कभी सर उठाकर तो देखो, देखो इन पहाड़ों को देखो इन सागर के किनारों को कभी सर उठाकर को देखो, देखो इस हरियाली को देखो इस खुशहाली को कभी सर उठाकर को देखो, ये शांति भरी निगाहें जो हर दिल में उतरती हैं ये अमन की तस्वीर हैं जो सबके दिल में बसती हैं कभी सर उठाकर को देखो।