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Showing posts from May, 2024

समझ।

न समझ लोग ही अच्छे होते हैं, क्योंकि समझ आने पर, लोग सिर्फ मतलब से बोलते है।

बेवकूफ।

जैसे अब आग को फायर कहने लगे पाहिए को टायर कहने लगे पर कुछ बेवकूफ़ शांत रहने वाले को कायर कहने लगे।

उम्र।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ेगी, वैसे ही आपकी जिंदगी से लोग कम होते जायेंगे।

कहानी।

अगर आपकी कहानी आपके अनुसार ख़तम नहीं होती, तो इसका मतलब है पिक्चर अभी बाकी है...

भूल गए।

हुआ सवेरा तो हम उनके नाम तक भूल गए,  जो बुझ गए रात में चरागों की लौ बढ़ाते हुए।

मेरा प्यार।

वो मुस्कान झूठी है या सच्ची, ये मैं क्या जानूं,  सच्ची है मोहब्बत या नफरत उसकी,  ये मैं क्या जानूं  मैं जानू बस मेरा प्यार जिसपे होता हूं मैं निसार,  बाकी सब मैं क्या जानू...

मेरा प्यार।

वो मुस्कान झूठी है या सच्ची, ये मैं क्या जानूं,  सच्ची है मोहब्बत या नफरत उसकी,  ये मैं क्या जानूं  मैं जानू बस मेरा प्यार जिसपे होता हूं मैं निसार,  बाकी सब मैं क्या जानू...

एक सच्ची कविता।

कितना हसीन है ये नजारा  कभी सर उठाकर तो देखो, देखो इन पहाड़ों को देखो इन सागर के किनारों को  कभी सर उठाकर को देखो, देखो इस हरियाली को देखो इस खुशहाली को  कभी सर उठाकर को देखो, ये शांति भरी निगाहें जो हर दिल में उतरती हैं  ये अमन की तस्वीर हैं जो सबके दिल में बसती हैं  कभी सर उठाकर को देखो।

गुनाह |

मुस्कुराकर किया गया गुनाह अब गुनाह नहीं,  अदालतों की दरियादिली की इन्तेहाँ देखिए ।

बदनाम।

हम आह भी भरते है, तो हो जाते है बदनाम,  वो कतल भी करते है तो चर्चा नहीं होता।