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मेरा प्यार।

वो मुस्कान झूठी है या सच्ची,
ये मैं क्या जानूं,
 सच्ची है मोहब्बत या नफरत उसकी,
 ये मैं क्या जानूं 
मैं जानू बस मेरा प्यार जिसपे होता हूं मैं निसार, 
बाकी सब मैं क्या जानू...

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मन के भीतर।

कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान ।