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भूल गए।

हुआ सवेरा तो हम उनके नाम तक भूल गए, 
जो बुझ गए रात में चरागों की लौ बढ़ाते हुए।

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मन के भीतर।

कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान ।