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एक सच्ची कविता।

कितना हसीन है ये नजारा 
कभी सर उठाकर तो देखो,
देखो इन पहाड़ों को देखो इन सागर के किनारों को 
कभी सर उठाकर को देखो,
देखो इस हरियाली को देखो इस खुशहाली को 
कभी सर उठाकर को देखो,
ये शांति भरी निगाहें जो हर दिल में उतरती हैं
 ये अमन की तस्वीर हैं जो सबके दिल में बसती हैं 
कभी सर उठाकर को देखो।

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मन के भीतर।

कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान ।