Skip to main content

बातें और वक्त।

बातें बहुत है कहने को,
मगर वक्त कहां मिलता है

प्यार बहुत है जताने को,
मगर प्यार कहां मिलता हैं

जख्म बहुत है दिखाने को
मगर मलहम खा मिलता हैं,

मिला न वक्त पर ये सब,
अब मिले तो फायदा क्या 
बीता हुआ वक्त कहां मिलता है।

Comments

Popular posts from this blog

मन के भीतर।

कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान ।