साथी? April 24, 2024 "धूप की साथी परछाई भी हाथ छुड़ा लेती है अंधेरे में, जिंदगी की शाम में नजारे कुछ यूं बदल जाते है" Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
मन के भीतर। August 26, 2024 कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान । Read more
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