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अकेलापन।

 इस तरह हो गया हूं अकेला 

की भीड़ में भी कोई नजर नहीं आता।

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मन के भीतर।

कहे बुरा मैनू तू तू भी कभी मन में झांक, जो झांका तूने मन में दिखा तुझे एक शैतान , ओड़े जो चोला शराफत का और मुंह से कहे हु मैं इंसान ।